
* समझदार कबूतर *
एक पेड़ पर बहुत सारे कबूतर झुंड में रहा करते थे |
कभी वह कबूतर उड़ कर दूसरे पेड़ पर बैठ जाते कभी वह नीचे जमीन पर उतरकर दाना चुगते | उस कबूतर के झुंड में बहुत सारे सुंदर-सुंदर कबूतर भी थे कोई सफेद था कोई कल था कोई सफेद और कल दोनों थे|
उस पेड़ के पास एक शिकारी आया उसने देखा कि इस पेड़ पर बहुत सारे सुंदर-सुंदर कबूतर हैं क्यों ना मैं इनको पकड़ लूं और बेच दूं | उस कबूतर पकड़ने वाले ने एक योजना बनाई |
शिकारी दूसरे ही दिन बहुत बड़ा एक जार लेकर आया | उसने ठान ली थी कि आज तो मैं सारे कबूतर पकड़ कर रहूंगा |
शिकारी ने जाल बिछाया और बहुत सारा कबूतरों के लिए दाना डाल दिया|
कबूतर बिना सोचे समझे अच्छा खाना देखकर पेड़ से नीचे उतर कर दाना चुगने बैठ गए | थोड़ी ही देर में जब सारे कबूतर जाल पर बैठकर दाना चुग रहे थे शिकारी ने मौका देखकर जल को कस दिया और सारे कबूतर उसमें फंस गए |
सभी कबूतर के पैर जाल में फस गए तभी कबूतरों ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया और एक योजना बनायीं |
सभी कबूतरों ने मिलकर जाल सहित उड़ना चालु कर दिया………. एक, दो, तीन, ” फुर्ररर ”
और शिकारी देखता ही रह गया |
दूर एक गांव के पास कबूतरों के दोस्त चूहे रहते थे | और उन्होंने कबूतरों का जाल काट दिया
और फिर सारे कबूतर ख़ुशी ख़ुशी आसमाँन में उड़ने लगे |
तोह बच्चों इस कहानी से हमे यह सीख मिलती हैं की
” मुसीबत के समय हमे दूसरों की मदत करनी चाहिए”
” एकता में बोहत ताकत होती हैं ”
“हिम्मत से जुड़े रहे तोह बड़ी से बड़ी मुसीबत से निकल सकते हैं |