पंचतंत्र की कहानी

कछुआ और हंस (The Tortoise and the geese)
पंचतंत्र से एक ज्ञानवर्धक कहानी
एक सुन्दर झील के किनारे रहता था एक कछुआ, साथ में उसके दो सुन्दर हंस भी थे, जो उसके ख़ास दोस्त बन गए थे । वे अक्सर एक साथ बैठा करते, और गप्पें मारा करते थे, नई-नई जगहों की कहानियां हंस कछुए को सुनाया करते थे।
पर एक साल बाद , झील सूखने लगी, सभी चिंतित हो गए, हंसों ने फैसला किया कि वे जाएंगें दूर किसी और झील को ढूँढने। कछुआ भी जाना चाहता था साथ, मगर कछुवा तो उड़ नहीं सकता था, दोनों हंस उसकी इस दुविधा का समाधान खोजने में लग गए ।
अंत में एक उपाय सोचा, एक डंडा उठाया, कहा कछुए से कि डंडे को मुंह में दबाये रखना , वे दोनों हंस डंडे के दोनों सिरों को पकड़ेंगे, उड़ान भरेंगे, और कछुए को नई झील तक ले जाएँगे।
“पर याद रखो,”
हंसों ने कछुए को चेतावनी दी थी,
“तुम्हें चुप रहना होगा, जरा भी न बोलना, बस डंडे को दबाये रखना।” हंसों ने उड़ान भरी, सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी नीचे लोगों ने उन्हें देखा और शोर मचाना शुरू करदिया ।
कछुआ उत्सुकता से बोलने लगा,
भूल गया था चुप रहना, और जैसे ही उसने मुंह खोला, वह नीचे गिर पड़ा और अपना अंत कर बैठा।
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं की
-बिना सोचे-समझे बोलना, कभी-कभी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है और दु:खद भी हो सकता है ।