
🌳 चतुर तोता और चालाक लोमड़ी 🦊🦜
किसी सुन्दर घने जंगल में एक समझदार तोता रहता था—नाम था मीठू। वह एक ऊँचे आम के पेड़ पर रहता और रोज़ मीठे मीठे फल खता रहता ।
उसी जंगल में एक चालाक लोमड़ी भी रहती थी। वह हमेशा आसान रास्ते से खाना पाने की सोचती रहती ।
एक दिन लोमड़ी ने मीठू को मीठा आम खाते देखा और सोची—
“अगर मैं इस तोते को पकड़ लूँ, तो रोज़ मीठे आम खा सकती हूँ!”
वह पेड़ के नीचे खड़ी होकर बोली,
“अरे मीठू! तुम कितने सुंदर और मीठी आवाज़ वाले पक्षी हो! तुम मेरे करीब क्यों नहीं आते? मैं तुम्हें स्वादिष्ट खाना दूँगी।”
चतुर तोता समझ गया कि लोमड़ी उसे फँसाना चाहती है।
वह हँसकर बोला—
“अच्छा! तुम मुझे खाना दोगी? पहले तुम अपने दाँत दिखाकर मुस्कुराओ, ताकि मुझे पता चले तुम कितनी दयालु हो।”
लोमड़ी मन ही मन खुश हुई—“तोता फँस गया!”
वह बड़े-बड़े दाँत दिखाकर मुस्कुराई।
तोता बोला, “धन्यवाद! अब मुझे सब समझ आ गया।”
और वह तेज़ी से उड़कर ऊँची शाखा पर चला गया।
लोमड़ी गुस्से से बोली,
“इस तोते ने तो मुझे बेवक़ूफ़ बना दिया !”
मीठू ने उत्तर दिया,
“लोमड़ी बहन, मीठे शब्दों का मतलब यह नहीं कि इरादे भी मीठे हों।”
लोमड़ी ग़ुस्सा होकर वहाँ से चली गई, और तोते ने जंगल में सभी को सावधान रहने की सलाह दी।
**✨ Moral of the Story:
मीठी बातें करने वाले सभी लोग सच्चे नहीं होते—समझदारी से काम लेना ही बुद्धिमानी है।