
“एक ब्राह्मण और बकरी ”
एक गांव में यमुना किनारे एक ब्राह्मण रहता था | वह ब्राह्मण बहुत ही धार्मिक और ईश्वर में आस्था रखने वाला था | वह आसपास के गांव में पूजा पाठ कर ईमानदारी से पैसे कमाता था और अपना घर चलाता था | एक दिन वह ब्राह्मण एक यजमान के घर पूजा करने गया| पूजा बहुत अच्छी हुई और वह दंपति बहुत खुश होकर उसे ब्राह्मण को एक भेंट में एक बकरी दी |
ब्राह्मण बहुत खुश होकर अपने गांव की ओर लौट रहा था | उसने बकरी को अपने कंधे पर बैठाया और अपने घर की तरफ चल पड़ा |
वह ब्राह्मण मन ही मन सोच रहा था कितना अच्छा परिवार था जिसने मुझे पूजा की भेंट में एक बकरी दे दी |
इस बकरी को देखकर मेरा परिवार बहुत खुश हो जाएगा |
जैसे वह ब्राह्मण अपने गाँव के घुमावदार रास्ते पर चल रहा था, उसे यह पता ही नहीं चला कि तीन बदमाश उसका पीछा कर रहे हैं। उन बदमाशों ने उस ब्रह्म से बकरी को
लेने की योजना बनाई |
बदमाशों ने सोचा कि अगर हम इस बकरी को ले लेते हैं तो हमारे रात के खाने का भी इंतजाम हो जाएगा |
पहले बदमाश ब्राह्मण के पास गया और कहा ” अरे यह क्या आप इतने बड़े धार्मिक ब्राह्मण होकर एक इतने गंदे कुत्ते को अपने अपने कंधों पर बिठा रखा है”| ब्राह्मण गुस्से में आ गया और कहा “अरे तुम अंधे हो क्या “यह कोई कुत्ता नहीं है ” तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा यह एक बकरी है” | बदमाश ने कहा मैं तो अंधा नहीं हूं पर तुम जरूर हो” एक गंदे कुत्ते को तुमने अपने कंधे पर बिठा रखा है “और कह रहे हो यह बकरी है| यह कहकर वह बदमाश वहां से हंसते हुए निकल गया|
ब्राह्मण वहां से आगे ही बढ़ रहा था और दूसरा बदमाश आकर ब्राह्मण को देखकर हंसने लगता है और कहता है… अरे यह क्या तुमने एक मरे हुए बछड़े को अपने कंधे पर बिठा रखा है तुम इतने धार्मिक इंसान होकर एक मरे हुए बछड़े को कैसे तुम उठा कर ले जा रहे हो| ब्राह्मण गुस्सा होकर कहता है ” तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा यह कोई मरा हुआ बछड़ा नहीं है यह एक बकरी है” | बदमाश ब्राह्मण से कहता है अरे अरे गुस्सा मत करो जैसे तुम्हें अच्छा लगता है वैसा करो और हंसते हुए वहां से निकल गया |
ब्राह्मण फिर आगे बढ़ने लगा और वहां पर तीसरा बदमाश आया और कहने लगा अरे अरे रुको रुको यह क्या तुमने तो एक गधा अपने कंधे पर बिठा रखा है ब्राह्मण को फिर गुस्सा आया और ब्राह्मण ने कहा यह कोई गधा नहीं है यह बकरी है| बदमाश कहता है कि अगर तुम्हें कोई देखेगा ऐसे एक गधे को अपने कंधे पर बिठाकर जा रहे हो तो वह तुम्हारे बारे में क्या सोचेंगे | यह कहते हुए हंसकर वहां से निकल गया|
यह सब बातें सुनकर ब्राह्मण बहुत घबरा गया और सोचा कि मैं तो बकरी अपने कंधे पर उठा रखी थी पर यह सब लोग मुझे कोई कह रहा है कि मैं गधा उठा रखा है कोई कह रहा है मैंने बछड़ा उठा रखा है और कोई कह रहा है कि तुमने एक गंदा कुत्ता उठा रखा है यह सब यह क्या बोल रहे हैं कहीं यह बकरी कोई शैतान तो नहीं जो अपना रूप बदल रही है |
यह सोचते हुए ब्राह्मण घबराकर बकरी को अपने कंधे से नीचे उतरकर और वहां से जोरदार भागते हुए अपने घर की और दौड़कर चला जाता है |
दूसरी और वह बदमाश यह सब देखकर बहुत खुश होते हैं और उसे बकरी को पड़कर अपने साथ अपने घर ले जाते हैं |
तो बच्चों इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है
“दूसरों पर भरोसा करने से पहले अपने आप पर भरोसा करना सीखो ”